ब्राज़ील में क्रिश्चियन डॉक्ट्रिन फादर्स

1947 में रिबेइराओ प्रेतोमें आगमन

रिबेइराओ प्रेतो डायसिस के बिशप मानुएल दी सिल्वेइरा दी एलबुक्स के द्वारा1947 में डॉक्ट्रिनफादर्स को ब्राजील में आमंत्रित किया गया था।
मिशन पर निकलने वाले पहले डॉक्ट्रिन फादर्स, लगभग साठ वर्षीय जोवान्नी देलपेरो, जो धर्मसंघ के पूर्व विकर जनरल थे, और बीस वर्षीय फ्रांसेस्को बालत्सोला ने 20 जून को जेनोवा के बंदरगाह से प्रस्थान किया। फादर बालत्सोला अपनी डायरी में लिखते हैं: «यह खूबसूरत दिन मेरे जीवन की सबसे खूबसूरत तारीखों में से एक रहेगा। (…) मेरे दिल से एक भावुक प्रार्थना निकलती है: “धन्यवाद प्रभु, प्राप्त सभी हितों के लिए धन्यवाद, मुझे चुनने के लिए धन्यवाद, इस अद्भुत दिन पर मुझे मिले सभी लाभों के लिए धन्यवाद … (…) लोगों को मेरे पुरोहिताई का पहला फल दे पाने की प्रसन्नता है, आगे बहुत सारे भाइयों से मिल पाने, उन्‍हें प्यार देने और मदद करने की खुशी है, फिर एक सुनिश्चित काम पाने अर्थात दैनिक रोटी पाने की प्रसन्नता है”।
वे 3 जुलाई 1947 को सांतोस में उतरते हैं और रिबेइराओ प्रेतो के लिए प्रस्थान करते हैं, जहां वे स्नेही और अभिनन्दनीय लोगों से मिलकर घुलमिल जाते हैं। एक महीने बाद बिशप ने दोनों पुरोहितों की देखभाल के जिम्मे संत जोवाकिम दा बारा पल्ली सौंप दिया। फादर देलपेरो पल्ली पुरोहित और फादर बालत्सोला उनके सहायक बने। उद्घाटन समारोह 2 सितंबर को शहीद धन्य डॉक्ट्रिन फादर्स के दिन संपन्न हुआ।
1948 में, दो अन्य फादर्स इटली से ब्राजील के लिए रवाना हुए, जो सिल्वियो गास्पारोत्तो और एर्नेस्टो फेर्रेरो थे। कुल चार फादर्स के साथ पास्टोरल कार्य का विस्तार हुआ। धर्मसंघ के जिम्मे दो और पल्लियों को सौंपा गया, इपुआ और मिगुएलोपोलिस। लगभग सत्तर किलोमीटर दूर एक अन्य गुआइरा पल्ली को भी मिगुएलोपोलिस में जोड़ दिया गया।
1949 की शुरुआत में, कातान्दुआ के पल्ली पुरोहितमान्यवर अल्बिनो दा सिल्वा कुन्हा डॉक्ट्रिन फादर्स के सुपीरियर जनरल से मिलने रोम आते हैं। इस बैठक के बाद, डॉक्ट्रिन फादर्स ने संत जोस दो रियो प्रेतो डायसिस के अन्‍तर्गत कातान्दुआ में एक नया मिशन केन्‍द्र खोला गया, जहां इटली से चार अन्य फादर्स आते हैं: ऑरलैंडो विस्कोन्ती, जोसेफ वल्सानिया, चेसारकाउदा और फ्रांसेस्को रास्पिनो।

कातान्दुवा में स्कूल

फादर काउदा, युवाओं की बड़ी संख्या से मिलने के बाद उनसे प्रभावित होकर,एक स्कूल की स्थापना का विचार परिपक्व करते हैं जिसकी शुरूआत डायसिस के बिशप के नाम, एक साधारण सा “डॉम लफाएते” बोर्डिंग स्कूल के साथ होती है। जल्द ही बोर्डिंग स्कूल को एक हज़ार छात्रों की क्षमता वाली नई इमारत के साथ “जीजस एडोलेशेंट” हाई स्कूल में बदल दिया गया। अन्य फादर्स पल्ली की सेवा में तथा अन्‍य निर्माण कार्य की सेवा में लग जाते हैं।
1951 में, फादर जनरल कार्लो रिस्टा ने ब्राजील की अपनी पहली आधिकारिक यात्रा संपन्न की और अगले साल कॉन्ग्रिगेशन के जनरल चैप्टर में पहली बार ब्राजील के एक प्रतिनिधि का स्वागत हुआ। एसेम्बली में इकट्ठे हुए चैप्‍टर के फादर्स फादर बालजोला को प्रोविन्शिअल के पद के समरूप ब्राजील का सुपीरियर चयनित करने का प्रस्ताव करते हैंजिसे स्वीकार कर लिया जाता है। 1953 में जनरल कौंसिल फादर सिल्वियो गास्पारोत्तो को “ब्राज़ील के सदनों के प्रतिनिधि” के रूप में नियुक्त किया जाता है, जिसके पद की मान्‍यता प्रोविन्शियल के बराबर थी, जबकि नोविशिएट में भर्ती, अस्थायी अथवा आजीवन व्रत के लिए मंजूरी प्रदान करना और पुरोहिताभिषेक देने की जिम्मेदारी सुपीरियर जनरल के हाथो रही।
इस बीच, आध्यात्मिक कार्य के साथ-साथ भवन का निर्माण भी आगे बढ़ता रहा, जैसे कि, कातान्दुवा और गुइरा में सेमिनरी, संत जोआकिम दा बारा में नोविशिएट, नोस्‍सा सेन्होरा आपारेसिदा (माँ मरियम) तीर्थस्थल, कातान्दुवा कासंत फ्रांसिस असीसी चर्च, सेंट पौल का सैन फ्रांसेस्को डी सेल्स चर्च और फिलोसोफिकल-थेओलोजिकल कॉलेज। डॉक्ट्रिन फादर्स ब्राजील में प्रथम बुलाहटों का स्वागत करनाप्रारम्भ करते हैं।
1954 में, फादर अत्तिलियो गर्रोने और एलियो लुपानो ब्राजील पहुंचते हैं और 1955 में फादर देलपेरो की मृत्यु के बाद, अन्य सह-पुरोहित विभिन्‍न समयों पर आते हैं, जैसे फादर मारियो लानो, फादर जोसेफ बोत्ता, फादर लुइजी मोस्कोनी, फादर लुसियानो कपेल्लारी, फादर जीनो बेर्तांग, फादर आल्दो बजिलेत्ती, फादर अगोस्तिनो फेर्रेरो, फादर जोवान्नी अल्बेरा और फादर कार्मेलो ज़गारेल्ला।

1965 में ब्राज़ील के प्रथम डॉक्ट्रिन पुरोहितों का पुरोहिताभिषेक

1965 में पहली बार ब्राजील के प्रथम डॉक्ट्रिन पुरोहितों का पुरोहिताभिषेक होता है, जैसे फादर वाल्देसिर दो एस्पिरितो सान्तो, फादर जोस आल्वेस दा कोस्ता और फादर जोस सेमिनाती। ब्रदर इजाइयास क्वेरोज़ दो नाशिमेंतो आजीवन धर्मबंधु का व्रत लेते हैं और वे “जीजस एडोलेशेंट” हाईस्कूल के कार्यालीय प्रभार में फादर काउदा का दाहिना हाथ बन जाते हैं।
इटैलियन डॉक्ट्रिन फादर्स और ब्राज़ील की नई बुलाहटों से ब्राजील के अन्य राज्‍यों में पास्टोरल कार्य का विस्‍तार होता है। 1975 में पोंता ग्रोस्सा (पाराना राज्य) में फादर रेनातो कान्ता की कीमती उपस्थिति से पल्ली सँभालने तथा सेमिनरी में काम करने के अतिरिक्त फादर तुलियो मोंदो को डायसिस में कैटेकेटिकल सेंटर का प्रमुख नियुक्त किया जाता है।
1984 में पाराना राज्य के अंतर्गत शापेको डायसिस के सेंट डोमिंगोस पल्ली की देखभाल के लिए एक सदन खोला जाता है।
1986 में फादर जोस आल्वेस डा कोस्टा को पोंता ग्रोस्सा डायसिस का सहायक बिशप नियुक्त किया जाता है, जिसे 1991 में कोरुम्बा (मातो ग्रोस्सो) डायसिस में स्थानांतरित कर दिया गया। वे 1999 में स्वास्थ्य की समस्याओं के कारणपोप द्वारा डायसिस संचालन से इस्तीफा मंजूर कर लेने के बाद, विनम्रता और सुयोग्यता के साथ नोविस मास्टर, प्रोविन्शिअल और जनरल काउंसलर की भूमिका निभाते हुए संस्था के समुदाय में वापस लौट आते हैं।
वर्षों के विकास और नए घरों के खुलने के बाद, 1992 में, ब्राज़ीलियन डेलिगेशन एक स्वायत्त प्रोविंश बन जाता है, जिसका अपना प्रोविन्शिअल सुपीरियर होता है।
इन वर्षों में, डॉक्ट्रिन फादर्स नेसांतोस, कारागुआतातुबा जैसे अन्य डायसिस में सेवा दी तथा धर्मप्रान्तीय, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर भी कैटेकेटिकल एनीमेशन में बहुमूल्य योगदान दिया। फादर विल्सन दियास डी ओलिवेइरा ब्राजील के बिशप के राष्ट्रीय सम्मेलन के बिब्लिकल-कैटेकेटिकल सेवा के प्रभारी बनाए जाते हैं, फादर वाल्देसिर दो एस्पिरितो सान्तो और फादर लुइस गोंजागा बोलिनेल्ली क्षेत्रीय और धर्मप्रान्तीय स्तर पर प्रभारी बनते हैं। आज कातान्दुआ का प्रतिष्ठित “जीजस एडोलेशेंट” स्कूल, और कातान्दुआ, ग्वाईरा, सेंट पौल और बेर्तियोगा पल्ली में डॉक्ट्रिन फादर्स द्वारा दी जा रही सेवा कुछ उदहारण हैं।

डॉक्ट्रिन फादर विल्सन दियास डी ओलिवेइरा बिशप नियुक्त

2007 में, ब्राजील में क्रिश्चियन डॉक्ट्रिन फादर्स की उपस्थिति की साठवीं वर्षगांठ के अवसर परफादर विल्सन को लिमेइरा का बिशप नियुक्त किया गया।
90 के दशक के अंत से बुलाहट का संकट प्रारम्‍भ होने के कारण प्रोविंश को सीमित गतिविधियों के साथ सिर्फ सेंट पौल राज्य में ही अपनी उपस्थिति बनाए रखना पड़ रहा है।